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Shubham Verma

Shubham Verma

Development Associate | VIF

वैसे तो मै ग ाँव में ही पल बढ़ ह ाँ तथ भ रत के कई ग ांवों में घ मने क सौभ ग्य बब तक ् ्त हो ुकक है मगर इस ब र क झ बकआ भ्रमण क बनकभव बदभकत रह | ववज़न इांडिय फ उांिेशन के बपने स थथयों के स थ बक्ट बर के पहले स्त ह में झ बकआ भ्रमण करने क बवसर ममल | मह त्म ग ाँधी कहते थे की बसली भ रत ग ाँव में बसत है और इत्तेफ क़ की ब त है की ग ांधी जी के जन्मददन के ददन २ बक्ट बर से ही यह य त्र ् रांभ हकई |मध्य्देश के ववददश से भोप ल , भोप ल से इांदौर तथ इांदौर से झ बकआ तक क सफ़र बस में तय करके मै झ बकआ पहकांु | इांदौर से झ बकआ तक की सड़के देखकर सु में लग की मध्य्देश में सड़कों क ज ल ग ाँव ग ाँव तक बबछ य ज ुकक है | आददव सी इल कों तक सड़क , बबजली तथ मोब इल नेटवकक की कनेक्क्टववटी देखकर मन को बहकत ्सन्नत हकई |
्थम ददन हम सभी झ बकआ में मशवगांग के धरमपकरी न मक स्थ न पर ही ्कृतत के खकले व त वरण में रुके | वहीीँ प स में एक छोट स त ल ब थ क्जसमे ककछ आददव सी बच्ुे तैर रहे थे | हम सभी ममत्र भी उसे देखकर उसमे क द पड़े तथ क फी देर तक ऐसे शकद्ध प नी में स्न न क बनकभव ककय जैस बड़े मेट्रो शहरों में श यद ही ममल सके | दोपहर को सभी ने झ बकआ के मशवगांग न मक सांसथ न के क यककत कओां जैसे तनततन ध कड़, शकभम इत्य दद से ब तुीत की तथ उनके और उनके क म के ववषय में ज नक री ् ्त करी | मशवगांग क क यक इतन बदभकत थ की उसके ब रे में ज नते ज नते न ज ने कब र त हो गयी पत ही नहीां ुल | देर र त तक मशवगांग के र ज र म जी से ‘हलम ’ , ‘म त वन’ इत्य दद के ववषय में ज नक री ् ्त करके हम सभी सोने ुले गए |
द सर ददन एक ख़ स रोम ांु लेकर आने व ल थ | सकबह उठते ही हमें पत ुल की हम सभी ममत्रो को, बलग-बलग बनज न ग ाँवों में भेज ज एग तथ प रे २४ घांटे हमें उस ग ाँव में उन लोगों के स थ बबत ने हैं और वहीीँ भोजन करन है तथ वहीीँ र त बबत नी है | सभी लोगों के मन में यह ुल रह थ की वह ां क्य होग ? कैसे रहेंगे ? क्य ख येंगे ? इत्य दद | मगर स थ ही मन में एक नयी जगह को ज नने क उत्स ह भी थ | बतः न श्त करके सभी बपने बपने ग ाँव के सदस्य , जो की पहले से वह ां मौज द थे , उनके स थ उनके ग ाँव ुल ददए | मकझे मेरे स थी के रूप में सकरेश ुकि वददय जी ममले क्जनके स थ मै उनकी ब इक पर बैठकर उनके ग ाँव पीथनपकर की ओर ुल ददय | र स्ते में ग ाँव क ह ट , ब ज़ र, जांगल, त ल ब इत्य दद ददख ते हकए सकरेश जी मकझे बपने ग ाँव की ओर ले गए |
सुरेश जी
ग ाँव पहकांुकर सबसे पहले हमने जो देख वह थी ग ाँव की –
आंगनवाडी –
यह ाँ आांगनब ड़ी भवन बन हकआ थ | बन्दर नसक ककछ मदहल ओां क ुेकबप कर रही थी क्योंकक वह ुेकबप क ददन थ | प स ही में आांगनब ड़ी क यककत क ककछ बच्ुों को पड़ रही थीां | उनसे मैंने ब त की तो पत ुल वह ां (0 -५) वषक के बच्ुे आते हैं तथ इनकी आांगनव िी में ककल ६५ बच्ुे थे | मशक्षिक ने हमें यह भी बत य की वो वह ां इन सबको खेल खखल ती हैं , भोजन देती हैं , सांस्क र मसख ती हैं तथ ् थकन मसख ती हैं | मांगलव र को आांगनब ड़ी में ककशोरी ब मलक ओां क ्मशिण होत है | स्वसह यत सम ह बच्ुों के मलए भोजन बन ते हैं तथ ककपोवषत बच्ुों को यह ाँ ३ ब र भोजन ददय ज त है | यह ाँ यह भी पत ुल की ककछ बच्ुे आांगनब ड़ी इसमलए छोड़ देते हैं क्योंकक उनके म त वपत को ककसी ख़ स मौसम में गकजर त में मजद री करने ज न पढत है तो वह लोग बच्ुे स थ ले ज ते हैं |
ककछ बच्ुो को वह ां नहीां देखकर जब उनके ब रे में पकछ तो पत ुल ककछ बच्ुों को म त वपत कभी कभी खेत ले ज ते हैं क्योंकक उनक और छोट बच्ु झ ले में होत है तो उसे वो बच्ुे साँभ लते रहते हैं | इसे ज नकर बन य स ही मन में आय की शहर में बमीरों के १५ स ल तक के बच्ुे कोई क म नहीां कर प ते और आददव मसयों के ५ स ल से छोटे बच्ुे भी बपने छोटे भ ई बहनों को प ल लेते हैं | यही सोुते सोुते हम वह ां से ग ाँव की ओर ुल
ददए | ग ाँव पहकांुकर पत ुल की सकरेश जी की धमकपत्नी स्वसह यत सम ह ुल ती हैं बतः वह उसकी बैठक में गयी हकई थीां | सकरेश जी खकद उस समय ु ल्ह जल कर बपने ह थ से मकझे रोटी और सब्जी बन कर खखल ई और कह आददव मसयों में पकरुष स्त्री में भेद नहीां है | दोनों ममलजकलकर क म करते हैं | घर के बहकत से क म सकरेश जी को करते देख मकझे #MeToo गैंग की य द आ गयी जो देशभर के पकरुषों पर न री शोषण क आरोप लग ते रहते हैं | इसी के स थ मकझे उस ववदेशी ररपोटक की भी य द आई क्जसमे मदहल ओां को भ रत में सबसे बसकरक्षित बत य गय थ | मैंने मन ही मन सोु की शहर में बैठे बकवद्धजीवी श यद ही कभी बसली भ रत को समझ सकें | कफर ख ने के ब द हम लोग एक एनसी मदहल से ममलने गए क्जन्होंने कई मदहल ओां को स्वसह यत सम ह से जोड़ थ तथ स्वयां भी बपन सम ह ग ाँव में ुल रही थीां | उनक न म थ –
श्रीमती चम्पाबाई ममनामा (ग्राम – धमोई , ब्लोक-रामा , झाबुआ) –
चम्पाबाई ममनामा
इन्होने मकझे बत य की यह बहकत कम पड़ी मलखीां थीां | ५ वषक पहले यह स्वसह यत सम ह से जकिी तथ इन्होने १० औरतों को भी इसमें जोड़ | आज इनके द्व र तैय र की गयी मदहल एां ग ाँव में बगरबत्ती, स बकन, सफ़क, पोषण-व दटक ( स्वयां की जैववक सब्जी स्वयां उग न ), जैववक ख द, मसल ई, मकगी प लन इत्य दद कर रही हैं | इन्होने स्वयां ५ महीने पहले NRLM के म ध्यम से बगरबत्ती बन न सीख तथ यह बपने पतत के स थ इांदौर ज कर बगरबत्ती बन ने क स म न तथ मशीन खरीद कर ल यीां | आज यह ककछ मदहल ओां के स थ ममलकर बपन बगरबत्ती बन ने क स्वयां क लघकउद्योग ुल ती हैं | यही नहीां इन्होने बपने बच्ुो को भी बच्छी मशि दी है और १०० से ज्य द मदहल ओां को कई ग ांवों में स्वसह यत सम हों से जोड़ है | ऐसी मदहल शक्क्त को देखकर भ रत की ग्र मीण म तृशक्क्त को कौन नमन नहीां करन ु हेग | मकझे कफर शहर में बैठी बल्ट्र फेममतनस्ट #MeToo गैंग की य द आ गयी , कफर हम वह ां से त ल ब देखते हकए व पस सकरेश जी के घर आ गए | उनकी पत्नी घर आ ुककी थीां तथ वो दोनों ममलकर ख न बन ने लगे तब तक मै एक और ख़ स शक्क्सयत से ममल –
दिलीप चुडावदिया उर्ा िुलू जी –
िुलू जी
इन्होने बत य की यह सकरेश जी के भ ई हैं | बुपन से ही यह घर की खेती सांभ ल रहे हैं तथ इन्होने खेती की कम ई से बपन बड़ स घर बन मलय है | ज नने योग्य ब त यह है की इन्होने बपने घर की मजद री स्वयां की है मतलब ममस्त्री से लेकर सीमेंट ि लने तक क क म इन्होने स्वयां ककय है | ऐसे कमकठ हैं दकल जी मगर मकझे क्जस ुीज में रूथु थी वह थ इनक तीर कम न ुल ने क हकनर | इन्होने बत य की यह बुपन से तीर कम न ुल रहे हैं तथ झ बकआ और बलीर जपकर में यह बहकत स म न्य ब त है | इन्होने कह जांगली ज नवरों के हमलो से बुने के मलए पहले लोग तीर कम न रखते थे | बब यह कम हो गय है | इन्होने यह भी बत य की यह सब भील आददव सी हैं और एकलव्य के वांशज हैं | एकलव्य इनक र ज थ , यह सभी तभी से तीर ुल ते हैं | इन्होने कह तीर ुल ते समय यह मसफक उांगमलयों क इस्तेम ल करते हैं , इससे तनश न सटीक लगत है | इससे ही यह दांत कथ भी जकिी हकई है की एकलव्य से गकरु द्रोण ु यक ने जब गकरु दक्षिण में बांग ठ म ांग मलय थ , तब से कोई भी भील बपने गकरु के सम्म न में बांग ठे से तीर नहीां ुल त | इससे मकझे शहर के बकवद्धजीवी वगक के वो लोग य द आ गए जो आददव मसयों को ब्र ह्मणों य दहन्द धमक के खखल फ भड़क ने के मलए इस कथ क दकरूपयोग करते हैं | जबकक बसल क्जांदगी में तीर उांगमलयों से ुल य ज रह है और आददव सी सम ज द्रोण ु यक को गकरु बोलत है न की दकश्मन | तब लग की शहर के बांग्रेजी पढ़े बकवद्धजीवी देश से ककतने कटे हकए हैं | इसके ब द मकल क त हकई सकरेश जी की धमकपत्नी से क्जनक न म थ –
श्रीमती संगीता सुरेश चुडावदिया –
श्रीमती संगीता
इन्होने बत य की यह थ ांदल से हैं तथ १६ वषक की छोटी आयक में इनकी श दी हो गयी थी | ग ाँव में खेती में नककस न होने के क रन पररव र को बतनए से लोन लेन पड़ जो ककतन भी ुकक ओ बढ़त ही ज रह थ | उसी बीु इन्हें स्वयां सह यत सम ह के ववषय में पत ुल और यह इससे जकिी | NRLM की हर ट्रेतनांग इन्होने क्जद से ज कर प री करी | स थ ही स थ आगे पढ़ ई भी करी | आज इनके १० ग ाँव में लगभग ४० स्वसह यत सम ह ुलते हैं | यह बथधकतर के क गजी क म देखती हैं | बपने सम ह क क म करने के स थ स थ यह द सरो की भी भरसक मदद करती हैं | इनक कहन है –
“ मै यदद बपने घर में ख पी रही ह ाँ, बच्छ पहन रही ह ाँ, पर यदद मेरे पिोसी के घर में पहनने को कपि नहीां, तो सब ककछ ककस क म क है |”
बगले ददन सकबह हम ग ाँव के सरपांु से ममले क्जन्होंने बत य उन्होंने उनके ग ाँव में ववधव पेंशन, उज्ज्वल , ्ध नमांत्री आव स योजन , नल जल योजन इत्य दद योजन यें ल ग करी हैं | यही नहीां इनक ग ाँव खकले में शौंु से मकक्त भी हकआ है | इन्होने यह भी बत य की मनरेग में DBT होने से भ्रष्ट ु र में बहकत कमी आई है | इसके ब द हमने पीथनपकर के ‘वन्य कन्य आश्रम’ तथ लिको के हॉस्टल में ववक्जट करके उनसे उनकी मशि के ववषय में ब त की वह ां भी बच्ुो क पढ ई के ्तत उत्स ह देखने ल यक थ | इसके ब द ग ाँव की PHC देखकर वेटनरी िॉ न हर मसांह जी से ममले उन्होंने हमें पशकधन बीम योजन के ववषय में बत य क्जसमे पशकओ क बीम करव ने से उनके इल ज क खु क बीम कांपनी उठ ती हैं |
स्कूल
सरपंच
इसके ब द हम पीथनपकर ग ाँव से व पस धरमपकरी की ओर ुल पड़े | सुमकु २४ घांटो में बहकत ककछ सीखने को ममल थ | धरमपकरी पहकाँुने के ब द हम सभी ने आसप स के और ग ाँव घकमे क्जनमे ग्र मीणों ने मशवगांग की ्ेरण से हलम बकल कर खकद मेहनत करके त ल ब खोदे थे | यही नहीां हमने लोगों द्व र लग ये गए म तवन भी देखे क्जनमे लोगों ने हज रो पेड़ पौधे लग कर पह ड़ो तक को हर भर कर ददय थ | यहीां हम लोग म म ब लेश्वर दय ल जी के ग ाँव भी गए तथ उनके ववषय में भी ज न और र स्ते में मेक तनक की दकक न खोले हकए एक व्यक्क्त से भी ममले क्जन्होंने आईटीआई से कोसक करके बपन रोजग र शकरू ककय थ | यह सब ग ाँव के उन भील आददव मसयों ने ककय थ क्जनके ब रे में ब हर की दकतनय हमेश गलत ही सोुती रही है | आददव सी सम ज क यह बदभकत रूप देखकर हम सभी मेघनगर पहकांुे जह ाँ पर आददव सी बच्ुों क स्व वलांबी बनने क मशववर ुल रह थ | इसमें कई बच्ुे ब ांस के स म न बन ने क ्मशिण ले रहे थे | यह ाँ हम ममले उन दो व्यक्क्तयों से जो मशवगांग के ्ेरण स्त्रोत थे –
महेश शमाा जी एवं हर्ा चौहान जी –
महेश जी
महेश जी ने हमें बत य की वह यह ाँ लगभग १९९८ से क यक कर रहे हैं तथ इन्होने भी पहले आददव मसयों के ब रे में बकरी ब ते सकनी थी, पर जब वो यह ाँ घ मे तो इन्हें यह ाँ के सम ज की समझ हकई और इन्होने इसे ही इनकी शक्क्त बन ने की शकरुआत कर दी | धीरे धीरे सभी आददव मसयों ने ममलकर मशवगांग न मक सांगठन बन य और बपनी ् ुीन ्थ ओां जैसे ‘हलम ’ , ‘म त वन’ इत्य दद को समय नकक ल बन ते हकए पकनः स्थ वपत ककय |
हषक ुौह न जी ने बत य की हम द सरे एन.जी.ओ. की तरह नहीां हैं जो एक ट स्क लेते हैं और समय सीम में बांधकर जल्दब जी करते हैं |
उन्होंने कह – ‘ हम र प र ध्य न ‘व्यक्क्त-तनम कण’ की ओर है , यदद व्यक्क्त सकधर गय तो वह सम ज में सब ककछ सकध र सकत है |’ यही मशवगांग क म ल लक्ष्य है | श यद इसीमलए वह लोग ग्र म ववक स से लेकर जल सांरिण, मशि एवां स्व वलांबन जैसे कई ववषयों पर एक स थ क म कर प रहे हैं क्योंकक इन्होने २० स लों में ऐसे व्यक्क्तयों क तनम कण कर मलय है जो ककसी भी क म को करने के मलए बब पीछे नहीां हटने व ले |
मशवगांग से और झ बकआ से जो एक ब त सीखने ल यक है वो है ‘परम थक’ क भ व | यह प र सांगठन स्व थक पर नहीां ‘परम थक’ के भ व पर दटक हकआ है | कभी कभी आश्ुयक होत है की भ रत में ही एक तरफ वो लोग हैं जो छतीसगढ़, झ रखण्ि के आददव मसयों के ह थों में हथथय र थम कर उन्हें नक्सली बन रहे हैं और द सरी तरफ मशवगांग के जैसे सांगठन हैं जो लोगों में परम थक क भ व जग रहे हैं | सुमकु यह देश ववववधत ओां से भर हकआ है | यह जनत को तय करन है की सही कौन है ?
मै तो बनकभव के आध र पर मसफक इतन कह सकत ह ाँ की – “ककछ ददन तो गकज ररये – ‘झ बकआ’ में !!
आपका ममत्र,
आया शुभम वमाा